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मैं अपनी मौसेरी बहन को पसंद करता था. वो भी मुझे दिलोजान से चाहती थी. हम छुप कर मिलते थे. सबके सामने वो मुझे भाईजान कहती थी. अकेले में जान! मेरा नाम अशफ़ाक कुरैशी है, मेरी उम्र 24 साल की है. मेरा अभी कुछ माह पहले निकाह हुआ है. मैंने लव मैरीज की है. शनाज़ अब मेरी बीवी शनाज़ है. शनाज़ की उम्र अभी करीब 21 साल है. शनाज़ मेरी खाला ताहिरा की इकलौती बेटी है. मैं अपनी मौसेरी बहन शनाज़ को पसंद करता था और वो भी मुझे दिलोजान से चाहती थी. हम छुप छुप कर मिला करते थे. सबके सामने वो मुझे भाईजान कहती थी. शनाज़ की एक गलती की वजह से हम दोनों भाई बहन की मुहब्बत का राज हमारे बड़ों के सामने खुल गया. शनाज़ की अलमारी में उसकी किताबों के अंदर मेरा लिखा एक ख़त मेरी खाला ताहिरा के हाथ पड़ गया. खाला ने यह बात मेरी अम्मी को बतायी. हम दोनों की अम्मियों को जब हम दोनों की मुहब्बत की जानकारी हुई तो वे दोनों बहनें गुस्सा होने के बदले बहुत खुश हुई और हम दोनों का निकाह करवा दिया. ताहिरा खाला की सिर्फ एक बेटी है और मेरी अम्मी की हम दो औलादें हैं मैं और मेरी आपा! मेरी आपा ज़ोहरा का निकाह 6 साल पहले रफ़ीक़ से हुआ था और आपा अपनी ससुराल वा...